1. न्याय और अधिकार – अनुचित ऐप ब्लॉकिंग, टर्मिनेशन और फेक पेनल्टी के खिलाफ लड़ाई, हर वर्कर की समस्या को यूनियन के ज़रिए कंपनी तक पहुँचाना।
2. न्यूनतम मज़दूरी और आय की गारंटी – गिग वर्क को “नौकरी” का दर्जा दिलवाने की लड़ाई, हर वर्कर के लिए न्यूनतम आय तय करवाना।
3. सामाजिक सुरक्षा (Social Security) – ESI, PF, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाएँ दिलवाना, दुर्घटना/बीमारी में मुआवजा और परिवार को सहायता।
4. कानूनी मदद और संरक्षण – वर्कर्स के हक के लिए कोर्ट केस या कानूनी सहयोग, कंपनी और सरकार के विवाद की स्थिति में कानूनी प्रतिनिधित्व।
5. सेफ्टी और सुरक्षा डिलीवरी और कैब वर्कर्स के लिए सड़क सुरक्षा नियम लागू करवाना, लेडी वर्कर्स की सुरक्षा के लिए ऐप और फील्ड लेवल पर कड़े कदम।
6. वर्किंग कंडीशन सुधार कार्य समय, टार्गेट और इसेटीव पारदर्शी बनवाना, वर्कर्स को आराम का समय और सुरक्षित वातावरण।
7. भुगतान (Payments) – पारदर्शिता पेमेंट ङिले, कठौती और गलत चार्जिंग के खिलाफ आवाज, इंसेटिव और बोनस की गारंटी।
8. कंपनी से सामूहिक सौदेबाजी (Collective Bargaining) – हर बड़े बदलाव (रेट कटौती, ऐप अपडेट, इंसेंटिव स्कीम) में वर्कर्स की भागीदारी, कंपनी और वर्कर्स के बीच MOU/Agreement करवाना।
9. सरकार से संवाद और दबाव – संसद और विधानसभाओं में गिग वर्कर्स की आवाज पहुँचाना, गिग वर्कर्स के लिए नया कानून बनवाने की पहल, भारत सरकार से मांग कि गिग और प्लेटफोर्म वर्कर्सको श्रम कानूनों के दायरे में लाया जाए।
10. गिग वर्कर्स बोर्ड की स्थापना – कर्नाटक और तेलंगाना में गिग वर्कर्स बोर्ड पहले ही बन चुके हैं, बिहार में भी बोर्ड बनाने की मंजूरी दी गई है, यूनियन की मांग है कि ऐसे बोर्ड पूरे देश में बनाए जाएँ ताकि वर्कर्स को पेंशन, बीमा और सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
11. प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट – वर्कर्स के लिए फ्री ट्रेनिंग प्रोग्राम, टेक्नोलॉजी और नए प्लेटफॉर्म्स पर काम के अवसर बढ़ाना।
12. आपातकालीन सहायता (Emergency Support) – बीमारी, एक्सीडेंट या अचानक समस्या में तुरंत मदद, “वर्कर्स हेल्पलाइन” और इमरजेंसी फंड बनाना।
13. महिला वर्कर्स के लिए विशेष पहल – महिला गिग वर्कर्स के लिए सेफ्टी और स्पेशल स्कीम, मैटरनिटी बेनिफिट और हेल्थ कवरेज।
14. इंश्योरेंस और हेल्थ केयर – हर वर्कर को मेडिकल और लाइफ इंश्योरेंस उपलब्ध करवाना, हॉस्पिटल और मेडिकल चेकअप सुविधा।
15. एकता और आंदोलन – पूरे भारत के गिग वर्कर्स को एकजुट करना, धरना, रैली, कैंपेन और सोशल मीडिया पर आंदोलन।
16. पारिवारिक सहायता – वर्कर की मृत्यु/दुर्घटना पर परिवार को आर्थिक मदद, बच्चों की शिक्षा और स्कॉलरशिप योजना।
17. डिजिटल पारदर्शिता – ऐप एल्गोरिद्म और वर्क असाइनमेंट में पारदर्शिता, वर्कर्स का डेटा तक पहुँच दिलवाना।
18. नए अवसर और उद्यमिता (Entrepreneurship) – वर्कर्स को छोटे बिजनेस शुरू करने में मदद, कोऑपरेटिव और कलेक्टिव बिजनेस मॉडल को बढ़ावा।
19. वर्कर्स की आवाज और मीडिया – वर्कर्स की समस्या को मीडिया और समाज तक पहुँचाना, गिग वर्कर्स के मुद्दों को राष्ट्रीय बहस बनाना।